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Inductance क्या है?Inductance Formula क्या है?,Induction Meaning in Hindi || Mutual Inductance-Self Inductance क्या है?||


|| What is Inductance,Inductance Formula,Induction Meaning in Hindi || Mutual Inductance-Self Inductance in hindi||

Alternating-Current in hindi
Alternating-Current in hindi


Topic

  1. What is Inductance.
  2. InductanceFormula.
  3. Induction Meaning in Hindi.
  4. Mutual Inductance-Self Inductance in Hindi.


What is Inductance (प्रेरकत्व);-

जब किसी कुण्डली(windings)में एसी.प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर एक प्रत्यावर्ती-चुम्बकीय-क्षेत्र स्थापित हो जाता है,इस क्षेत्र उपस्थित उसी कुण्डली अथवा दूसरी कुण्डली में फैराडे के नियमानुसार एक विधुत वाहक बल(back EMF) पैदा हो जाता है,यह प्रभाव प्रेरण या Inductance कहलाता है।


  1. Note:- DC परिपथ में इंडक्शन नहीं होता, इंडक्शन के लिए 2 वाइंडिंग या कुंडलियों को आपस में संयोजन या स्पर्श करने की कोई आवश्यकता नही होतो है।

Inductance Meaning in Hindi;-

जब कुंडली में से Dc धारा प्रवाहित की जाती है,तो उसमें किसी प्रकार का Induction/प्रेरण प्रभाव पैदा नहीं होता है लकिन वह अपना एक चुम्बकीय क्षेत्र Magnetic-Fild अवश्य स्थापित करता है।परन्तु जब उसी कुण्डली में से ए.सी.प्रवाहित की जाती है,तो उसमें एक विरोधी विधुत वाहक बल(Back EMF)पैदा होता है जो आरोपित विधुत वाहक वाल का विरोध करता है। "कुण्डली का यह गुण उसका(Inductance)कहलाता है,क्योकि यह गुण केवल AC में पैदा होता हैं,DC पर नही,अत:हम कह सकते हैं कि ए.सी.परिपथों का वह गुण,जिसके कारण वह विद्युत धारा मान में होने परिवर्तनों का विरोध करता है,तो वह Inductance या प्रेरण कहलाता है। इन्डवटैन्स का प्रतीक(L)तथा मात्रक हैनरी(H)होता है"


What is Henrey हैनरी (1H) किसे कहते है?

यदि किसी कुण्डली में 1 एम्पियर प्रति सेकण्ड की दर पर विद्युत धारा के परिवर्तन से 1 वोल्ट का विधुत वाहक बल (Electro-Magnetive-Force)पैदा होता है तो उस कुंडली में उत्पन्न Inductance(1)हैनरी कहलाता है|
What is Henrey हैनरी (1H) किसे कहते है?

  • 1 हैनरी = 1वोल्ट / 1कूलॉम

हैनरी का छोटा मात्रक मिली हैनरी (mH) होता है।
हैनरी का छोटा मात्रक मिली हैनरी (mH) होता है।

What is Inductance Formula;-

Inductance की गणना निम्न सूत्र से की जाती है-

What is Inductance Formula

  1. L= Inductance, हैनरी में
  2. =कुण्डली में से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स, वेबर मे
  3. N=कुण्डली की लपेट संख्या
  4. I=कुण्डली मे गुजरने वाली विद्युत् धारा एस्पियर में। 


"Mutual Inductance Or Self Inductance in Hindi"

What is Self Inductance "स्व-प्रेरकत्व क्या होता है"?


जब किसी कुण्डली में से ए.सी प्रवाहित की जाती है तो उसके द्वारा विद्युत धारा के मान में होने वाले परिवर्तनो का विरोध करने का जो गुण होता है उसे self Inductance या स्व-प्रेरकत्व कहलाता है। सैल्फ इन्डक्शन के कारण कुण्डली मे एक विधुत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है,जो आरोपित विधुत वाहक बल के विपरीत दिशा मे कार्य करता रहता है इसलिए इसे विरोधी विधुत वाहक बल या Back E.M.F.कहलाता हैं|
What is Self Inductance "स्व-प्रेरकत्व क्या होता है"?
Self-Inductance




What is Self Inductance "स्व-प्रेरकत्व क्या होता है"?


  1. = विरोधी विधुत वाहक बल, वाल्ट में
  2. di/dt = विधुत धारा मान परिवर्तन दर, एम्पियर/सेकेण्ड में
  3. = सेल्फ इन्डक्शन, हैनरी में
  4. Note=



What is Mutual Inductance?


जब किसी कुण्डली में सेAlternating-Current प्रवाहित की जाती है तो उस कुण्डली द्वारा स्थापित प्रत्यावर्ती चुम्बकीय क्षेत्र में उपस्थित अन्य समी चालकों(Conductor)एवं कुंडलियों(Winding)में भी विधुत वाहक बल प्रेरित हो जाता है। या"दो कुण्डलियों का वह गुण, जो उनमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के मान में हों रहे परिवर्तनों का विरोध करती है,वह म्यूच्युअल इन्डक्शन(Mutual-Inductance)कहलाती है,इसका प्रतीक(M)तथा मात्रक हैनरी(H)होता है।
What is Mutual Inductance?
Mutual-Inductance





What is Mutual Inductance?

  1.  (M)  Mutual Inductance, हैनरी में,
  2.  (L1)= प्रथम कुण्डली का सैल्फ इन्डक्टेन्स,हैनरी में
  3. (L2)= द्वितीय कुंडली का सैल्फ इन्डक्शन,हेनरी में.

Grouping Of Inductors (इन्डक्टर्स का समूहन):-

प्रतिरोधको की भांति,इन्डक्टर्स को भी सामान्यतः श्रेणी एवं समानान्तर क्रम में संयोजित किया सकता है। 

  1. श्रेणी क्रम में in Series
  2. समानान्तर क्रम में In Parallel)

इन्डवटेन्स समान मात्रक मे
कुल इन्डक्टेस
यदि दो इन्डवटर्स के मध्य Mutual Inductance भी विद्यमान हो, तो


  • यहाँ, K का अर्थ है कपलिंग गुणाक।


What is Co-efficient of Coupling (कपलिंग गुणाक):-


जिसका मान दोनों कुण्डलियो के मध्य विद्यमान कपलिग के प्रतिशत पर निर्भर करता है। इसका मान सदैव 1.0 से कम होता है।यदि दोनो कुण्डलियों के चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कार्यरत हों,तो सूत्र मे ऋण चिन्ह(-)अन्यथा धन चिंह(+)प्रयोग किया जाता है। 

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